बिहार और झारखंड में एक साथ 5 अक्टूबर को प्रदर्शित होगी फिल्म-‘एक शातिर गुनहगार’

'एक शातिर गुनहगार'

ए पी ए प्रोडक्शन के बैनर तले निर्मित और बिहार शरीफ(बिहार) के चर्चित फिल्म निर्देशक एस के अमृत द्वारा निर्देशित सस्पेंस फिल्म–‘एक शातिर गुनहगार’ आगामी 5 अक्टूबर को बिहार और झारखंड प्रदेश के 100 सिनेमाघरों में एक साथ प्रदर्शित होगी।यह पहला अवसर है जब किसी स्थानीय फिल्मकार की फिल्म बड़े पर्दे पर एक साथ इतने ज्यादा सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी।यह एक ऐसी फिल्म है जिसे न तो व्यवसायिक और न ही कला फिल्म की श्रेणी में रखा जा सकता है।आम लीक से हट कर बनाई गई इस फिल्म में मध्यांतर के बाद रोमांस, एक्शन, कॉमेडी और ट्रेजडी सभी कुछ शामिल है।कर्णप्रिय गीतों से सजी इस फिल्म का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कोर्ट का दृश्य है जहां एक ईमानदार पुलिस निरीक्षक अपनी प्रेमिका की हत्या से जुड़े मामले का सामना कर रहा होता है।

फिल्म की कथावस्तु
संदेशपरक सस्पेंस फिल्म-‘एक शातिर गुनहगार’ की कहानी दो दिलों की दास्ताँ है।ऑफिसर राणा और सिमरन एक दूसरे से बेपनाह मोहब्बत करते हैं।जब सिमरन को अपने प्रेमी को रिश्वत लेने को प्रेरित करती है लेकिन राणा उसकी बातों को नहीं मानता है तो उससे अलग हो जाती है।राणा सिमरन को समझने का प्रयास करता है परंतु जब वो नहीं मानती है तो एक दिन राणा जबरदस्ती बलात्कार करने के क्रम में सिमरन की हत्या कर देता है।इसके बाद राणा कई लड़कियों को अपने जाल में फंसाता है और अपना काम निकलने के बाद उसकी हत्या कर देता है।इसी दरम्यान एक लड़की पूनम उसकी ज़िन्दगी में आती है।पूनम के साथ भी राणा जबरदस्ती बलात्कार करने की कोशिश करता है,उसी क्रम में पूनम अपने पेट में काँच की बोतल मार कर  आत्महत्या करने का प्रयास करती है और गंभीर रूप से जख्मी हो कर बेहोश हो जाती है….राणा उसे मरा हुआ समझ कर फरार हो जाता है।इसके बाद फ़िल्म का क्लाइमेक्स शुरू हो जाता है।पूनम अपने बयान में सारी बात डी एस पी को बताती है और राणा को मुजरिम साबित करने का प्लान बनती है।वह पूनम की आत्मा बन कर राणा का पीछा करती है।राणा उसके जाल में फँस जाता है।कोर्ट में बार बार सवाल किये जाने पर राणा अपना जुर्म क़बूल कर लेता है और उसे सजा हो जाती है।जेल में ही रहते हुए सिमरन के मामले में भी राणा अपना जुर्म क़बूल करता है।इस मामले में राणा को मौत की सजा मिलती है।
**संदेशपरक सस्पेंस फिल्म…..
महिलाओं के उत्थान पर जोर देती यह फिल्म जन जीवन से जुड़ी एक वास्तविक फिल्म प्रतीत होती है।जिसका मूल उद्देश्य समाज में जन जागरूकता अभियान को गति देना है जिससे वर्तमान प्रशासनिक व व्यवहारिक व्यवस्था में त्वरित गति से सुधार हो।  इस फ़िल्म के माध्यम से सन्देश देने का प्रयास किया गया है कि बुरे कर्मों का फल बुरा ही होता है।
बेशक, यह फिल्म देखने योग्य फिल्म है जिसमें अत्यन्त आकर्षक दृश्यों का चित्रांकन किया गया है।बहुत ही दिलकश अंदाज़ में सिने दर्शकों के बदलते हुए टेस्ट को ध्यान में रखते हुए फिल्मकार एस के अमृत ने अपनी कल्पना को पर्दे पर साकार किया है।

बैनर: ए पी ए प्रोडक्शन
निर्माता निर्देशक लेखक: एस के अमृत
डी ओ पी: विकेश राज
कोरियोग्राफर: बॉबी,मुकेश रॉक्सी
एडिटर : एस के बहाड़ी
प्रोडक्शन कंट्रोलर : सुधांशु
गीतकार : एस के अमृत
संगीतकार: पिंटू प्रवीण
मुख्य कलाकार : जयंत कुमार अमृत,अनिल धवन,रूपा सिन्हा, नाज़िया गुल,कल्पना शर्मा,साधना,कशिश, पूजा,प्रिया, अर्जुन ग्रोवर,मऊ पटेल,स्टार बबलू,गौतम गिरी,संजय हित, प्रकाश और नितेश आदि।

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