सदाबहार फिल्मों के निर्माता कमाल अमरोही की आखिरी निशानी ‘कमालिस्तान’

संवाद (काली दास पाण्डेय) : कमाल अमरोही ने 1953 में अपनी प्रोडक्शन कंपनी कमाल पिक्चर्स की आधारशिला रखी थी और कई फिल्मों के प्रोडक्शन के बाद  मुंबई के जोगेश्वरी इलाके में 1958 में कमाल अमरोही ने कमालिस्तान स्टूडियो की नींव रखी। कमालिस्तान आज भी अपने वज़ूद के साथ कमाल अमरोही स्टूडियो  के रूप में खड़ा है। इस स्टूडियो में ‘रज़िया सुल्तान’ की शूटिंग के लिए कमाल साहब ने बाग़-बग़ीचे लगवाये। वे आज भी फ़िल्मकारों के काम आते हैं। रेलवे स्टेशन की ज़्यादातर शूटिंग कमालिस्तान में ही होती है। कमालिस्तान हरा-भरा और ख़ूबसूरत स्टूडियो है।कमाल अमरोही का निधन 11फरवरी1993 को हुई।इसके बाद  इसे उनके बेट-बेटी चला रहे थे। कमाल अमरोही के बड़े बेटे शानदार के निधन के बाद छोटे पुत्र ताज़दार अमरोही ने स्टूडियो का शेयर डी बी रियलिटी प्राइवेट कम्पनी को बेच दिया।वर्तमान समय में स्टूडियो का संचालन प्राइवेट कंपनी कर रही है।
बॉलीवुड की तमाम बेहतरीन फ़िल्में यहां शूट हुई हैं,  बॉलीवुड वाले इसे आज भी बेहद लकी मानते हैं।
‘महल’ और ‘पाकीज़ा’ जैसी सदाबहार फ़िल्मों के निर्माता कमाल अमरोही की आख़िरी निशानी कमालिस्तान स्टूडियो पारिवारिक उलझनों के बीच संघर्ष के दौर से गुजर रहा है। जहां खुद कमाल अमरोही ने अपने कैरियर के शुरुआती दौर में बनी सुपर हिट अशोक कुमार स्टारर फ़िल्म ‘महल’ को इसी स्टूडियो में शूट किया था। वहीं, कमाल की आख़िरी सुपर हिट फ़िल्म ‘पाकीज़ा’ की शूटिंग भी इसी स्टूडियो में हुई थी।70 के दशक में बॉलीवुड के पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना और अस्सी के दशक में अमिताभ बच्चन के साथ कई सुपर हिट फ़िल्मों के मेकर ‘मनमोहन देसाई’ ने इसी स्टूडियो में ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘धर्मवीर’, ‘सच्चा-झूठा’ और ‘कुली’ की शूटिंग भी की। फ़िल्म मेकर सुभाष घई आज भी इस स्टूडियो को बेहद लकी मानते हैं।

'कमालिस्तान'
‘कमालिस्तान’

फिलवक्त मुंबई में मौजूदा स्टूडियो में से ज्यादातर  अब टी.वी. सीरियल, विज्ञापन फ़िल्मों या डॉक्यूमेंट्री की ही शूटिंग होती है।’सच्चा झूठा’  ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘कालिया’ और ‘रज़िया सुल्तान’ जैसी सुपरहिट फ़िल्मों को आकार देने वाले 4.5 एकड़ में फैले कमालिस्तान स्टूडियो के पास मुंबई के शूट फ्लोर एरिया का क़रीब एक-चौथाई हिस्सा है।जहाँ स्टार्ट टू फिनिश शूटिंग शेडयूल के साथ पूरी फ़िल्म शूट की जा सकती है।भारतीय फ़िल्म इतिहास को अपने आगोश में समेटे अमिट वज़ूद के साथ खड़ा  ‘कमालिस्तान’ आज भी कमाल अमरोही  स्टूडियो के रूप में बॉलीवुड फ़िल्म मेकरों के लिये लकी माना जाता है।

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