मोहब्बत और इंसानियत का पैगाम देती फ़िल्म “गेम ऑफ अयोध्या”

"गेम ऑफ अयोध्या"

संवाद प्रेषक (काली दास पाण्डेय) : सरोज इंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड की नवीनतम फ़िल्म ‘ गेम ऑफ अयोध्या ‘  में भारत की ऐतिहासिक घटना बाबरी विध्वंस और आडवाणी जी की रथ यात्रा के दौरान की एक युवा पत्रकार की प्रेम कहानी को निर्देशक सुनील सिंह ने बड़े ही कलात्मक ढंग से स्क्रीन पे पेश किया है । यह हिन्दू पत्रकार एक मुस्लिम लड़की से प्रेम  करता है । उन्हीं दिनों वह गलत रिपोर्टिंग की वजह से साम्प्रदायिक तनाव का हिस्सा बन जाता है।  वह हिन्दू पत्रकार रथ यात्रा के समय पूरे देश में फैली हिंसा व अराजकता की कवरेज करता है । अखबार को सुर्खियों में रखने के लिए उससे कुछ गलतियां भी हो जाती है । बाद में उम्र बढ़ने के साथ परिपक्वता आने पर पत्रकार को गलती का एहसास होता है और वह माफीनामा के तहत लिब्राहन आयोग के रिपोर्ट , ऐतिहासिक मसलों के जानकार शास्त्री जी , मुस्लिम लाइब्रेरियन और अपने प्रोफेसर ससुर की मदद से आज की युवा पीढ़ी को सच से अवगत कराता है ।
अयोध्या विवाद इतिहास की परिचर्चा और वास्तविक वीडियो फुटेज से फ़िल्म डॉक्यूमेंट्री सी लगती है मगर एक छोटी सी प्रेम कहानी मनोरंजन के साथ संदेश दे जाती है ।इस फ़िल्म में मकरंद देशपांडे , अरुण बक्शी , अभय भार्गव , एहसान खान , रोहन सिंह , पूजा , अमनदीप , सविता बजाज और सुनील सिंह ने अभिनय किया है ।

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