सुनहरे दौर के किस्से सुनाएंगे दीपक दुआ

दीपक दुआ

किस्सागोई की परंपरा अब डिजिटल रूप ले चुकी है। महफिलों से उठ कर रेडियो
तक पहुंची किस्सागोई अब मोबाइल ऐप्स के जरिए हर किसी की पहुंच में है। यही
कारण है कि स्वीडन मूल की कंपनी ‘स्टोरीटेल’ का ऐप काफी पसंद किया जा रहा है
जिसमें फिलहाल हिन्दी, मराठी और अंग्रेजी की बेशुमार रचनाएं सुनी-सुनाई जाती
हैं। अब इस ऐप से फिल्म समीक्षक दीपक दुआ भी जुड़ चुके हैं। वह अपने शो
‘सुनहरा दौर विद् दीपक दुआ’ में क्लासिक हिन्दी फिल्मों के बनने-संवरने की बातें
और उनसे जुड़ी दिलचस्प यादें व जानकारियां देंगे। दीपक बताते हैं कि फिलहाल
इस शो में पांच फिल्मों-‘खिलौना’, ‘वक्त’, ‘एक दूजे के लिए’, ‘साहब बीबी और
गुलाम’ और ‘जिस देश में गंगा बहती है’ के किस्से हैं और इसे आगे बढ़ाने की भी
योजना है। गौरतलब है कि 1993 से फिल्म पत्रकारिता में सक्रिय दीपक दुआ
‘चित्रलेखा’ और ‘फिल्मी कलियां’ जैसी नामी फिल्म पत्रिकाओं से जुड़े रहे हैं।
मिजाज से घुमक्कड़ दीपक फिलहाल अपने ब्लॉग ‘सिने-यात्रा’ के अलावा हिन्दी के
कई बड़े अखबारों, पत्रिकाओं, वेबपोर्टल पर लिखते हैं। गाहे-बगाहे टी.वी. चैनलों पर
दिखाई और आकाशवाणी के एफ.एम. चैनलों पर सुनाई दे जाते हैं। दीपक फिल्म
पत्रकारिता पढ़ाते भी हैं। साथ ही इनकी लिखी फिल्म ‘दंगल’ की समीक्षा देश के कई
स्कूलों में आठवीं कक्षा में पढ़ाई जाती है।

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