पुरानी डायरी “बॉर्डर”

पुरानी डायरी “बॉर्डर”

दिव्य सिंह राजपूत (सम्पादकीय : “हम हैं तो क्या हम हैं, तुम तुम हो तो क्या तुम हो”
बचपन, जब प्यार का मतलब, घरवाले और दोस्तों के बीच सिमटा रहता है, उस वक़्त एक नयी लहर भी दिल और दिमाग के हर तार को झकझोर देती है! खैर, कहने को तो बहुत सारी बातें है, मगर उन कथनों का प्रभाव हमारे व्यक्तित्व पर कितना पड़ा है, यह जानना ज़रूरी है!
बचपन में रविवार का अपना एक अलग महत्व हुआ करता था! हमे लगता था की हममें पर लग गये है और यह खुला आसमान हमारा है! ऐसे ही एक रविवार की सुबह जब हमारी आँख खुली तो “संदेशे आते है” गाना सुनाई दिया! हम टी.वी. वाले कमरे में पहुँच गये , और नज़र टी.वी. पर! इस गाने के बोल हमारे मानसिक पटल पर हथोड़ो की तरह चोट कर रहे थे! टी.वी. के सामने बैठ कर डी.डी. १ के “चित्रमाला” कार्यक्रम में वर्दी पहने हुए लोगो को गाते हुए देखने का एहसास! जाने अनजाने हमारे बदन में एक नया रोमांच पैदा हो रहा था, रोम रोम पुलकित और आँखों के किनारों पर पानी ! शायद यहीं वो समय था जब देशप्रेम की बीज हमारे मन मस्तिक में डल गयी थी! बात आई गई हो गयी ! हमारे घर के चाचा के शादी का कैसेट आया हुआ था, जिसे देखने के लिये रात में पूरा परिवार इक्कट्ठा होने वाला था ! लाजिमी है, की इसकी व्यवस्था भी करनी थी, और सबसे बड़ी समस्या बिजली थी! जो हर रोज नयी नवेली दुल्हन की तरह अपना झलक दिख कर अपने छोटे से कमरे में छिप जाती थी ! उस वक़्त भाड़े पर बैटरी , सी. डी. प्लेयर और फिल्मों की सी.डी. मिला करती थी ! अगर आप सी.डी. प्लेयर और बैटरी दोनों भाड़े पर लाते तो साथ में २ फिल्मों के सी.डी. आपको कॉम्प्लीमेंट्री के तौर पर दी जाती थी ! पापा अपने किसी दोस्त के दुकान से यह सामान भाड़े पर लाये थे! खैर, हम बच्चे लोगो के अन्दर इस बात की उत्सुकता थी की आखिर कौन कौन सी फिल्म आज देखने मिलेगी ! मगर शाम तक हमे भनक न लगी, इस बात की कौन कौन सी फिल्म आई है! क्यूंकि बड़ों को लगता था की हमारा ध्यान पढाई में नहीं लगेगा और एक दिन बर्बाद हो जायेगा ! उन्हें शायद इस बात का अंदाजा नहीं था की वैसे भी हमारा ध्यान उस दिन पढाई में कम और फिल्मों के ऊपर ज्यादा थी ! सब के सब अपनी अपनी पसंदीदा फिल्म के नाम ले रहे थे ! खैर, रात हुई और महफ़िल सजी ! ज़मीन पर बिछे हुए प्लास्टिक के बोरों पर सबने अपनी अपनी जगह तय की ! शादी के विडियो से कार्यक्रम की शुरुआत हुई ! सब बड़े ध्यान मग्न होकर देख रहे थे और अपने आप को टी.वी. के स्क्रीन पर देख कर खुश हो रहे थे! जो नहीं दिख रहा था उससे पूछा जा रहा था की तुम कहाँ गायब थे रिकॉर्डिंग के वक़्त ! और हम बच्चे बस इंतज़ार कर रहे थे की फिल्म शुरू हो ! आखिर वो घड़ी भी आई और स्क्रीन पर फिल्म का नाम उभरा “बॉर्डर”! फिल्म अपने तय सीमा में चल रही थी और हम सब ख़ुशी ख़ुशी देख रहे थे और अचानक “संदेशे आते है” गाना आँखों के सामने आया तो पूरे बदन में एक सिहरन पैदा हो गयी ! फिल्म देखते हुए अपने आप जबड़े भींच जाते और खून खौलने लगता ! देश के लिये प्यार का जो बीज चित्रमाला कार्यक्रम के इस गाने से डला हुआ था, आज वो सिनेमा देख कर अंकुरित हो उठा था ! बचपन के प्यार भरे दरबार में एक नए आंगंतुक का आगमन हो चूका था “देशप्रेम” ! जे.पी. दत्ता द्वारा निर्देशित यह फिल्म, हम सबकी आँखों में आंसू और देश के लिये जीने का जज़्बा बढ़ा देती है ! हम अपने घर में कितने सुरक्षित है, इसका एहसास तब और पुख्ता हो जाता है , जब हम अपने आस पास सेना की वर्दी में अपनों को देखते है

पुरानी डायरी  “बॉर्डर”
पुरानी डायरी “बॉर्डर”

“ मथुरा दास इससे पहले की मैं तुम्हे गद्दार घोषित करके , गोली मार दूं ! निकल जाओ यहाँ से ! सन्नी साहब के मुख से निकला यह संवाद आज भी दिल को दहला जाता है !
अक्षय खन्ना की अभिनय वाकई लाजवाब है और सबसे ख़ास हमारे सुनील शेट्टी साहब! आज भी इस फिल्म को देखते समय अनजाने प्रार्थना करने लगता हूँ की बस ये जीवित रहे !
जैकी दादा द्वारा बोला गया संवाद “ हम हम है तो क्या हम है, तुम तुम हो तो क्या तुम हो ! उनकी अदाकारी का दीवाना बना जाता है !
यह फिल्म हमें खुले शब्दों में यह दर्शा जाती है की देश से बड़ा कोई रिश्ता नहीं !
निर्माता , लेखक और निर्देशक :- जे.पी. दत्ता
कलाकार :-
सन्नी देओल
सुनील शेट्टी
अक्षय खन्ना
जैकी श्रॉफ
तब्बू
पूजा भट्ट
राखी
कुलभूषण खरबंदा
पुनीत इस्सर

गीत गायक
हिन्दुस्तान हिन्दुस्तान शंकर महादेवन, सोनाली
हमें जबसे मोहब्बत हो गयी है सोनू निगम, अल्का याग्निक
मेरे दुश्मन, मेरे भाई हरिहरन
संदेशे आते है रूप कुमार राठोड़, सोनू निगम
तो चलूं रूप कुमार राठोड़

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