स्त्री मर्द को दर्द भी होगा और गुदगुदी भी

मर्द को दर्द भी होगा और गुदगुदी भी
साधारण कहानी का शानदार प्रस्तुतिकरण
अदाकार :- राजकुमार, क्षद्धा कपूर, पंकज त्रिपाठी, अपारशक्ति खुराना, अभिषेक बेनर्जी,
निर्देशक:- अमर कौशिक
संगीत :-  सचिन जिगर
समय :- 128 मिनट
फ़िल्म के बारे में बात करे उससे पहले यह कहानी कहा से प्रेरित है इस पर चर्चा कर लेते है
दक्षिण भारत के एक गाँव मे एक कहानी प्रचलित थी कि
एक खूबसूरत वैश्या थी जो कि सच्चा प्यार खोज रही थी
ओर वह इसी खोज में मर कर चुड़ैल बन जाती है
तो वह साल में 4 दिन के लिए गाँव मे आती है और मर्दो को उठा ले जाती है
इसके लिए जादू टोना टोटका होता है
तो हर गाँव वाले अपने घर के बाहर लिख देता है
स्त्री “नाबूआ” मतलब
स्त्री कल आना, एक स्त्री के शारारिक चाह की जगह आध्यात्मिक प्रेम यही वजह रही फिल्म की बनने की
यह कहानी में कितनी सच्चाई है यह नही पता
लेकिन विषय रोचक और भावनाप्रधान होने के साथ हास्य और भय का मिश्रण बनाता है
फ़िल्म के शुरूआत में घोषणा आती है विषय पर विशवास आपके विवेक अनुसार कीजिये
चुकी दक्षिण भारतीय गाँव ओर परिदृश्य के साथ भाषा से दर्शक का जुड़ना मुश्किल होने के कारण फ़िल्म का परिदृश्य पूर्वी उत्तर प्रदेश रखा गया है ठीक मोलियर, शेक्सपीयर लेखकों के रशियन नाटकों के अंतरण मुस्लिम सभ्यता से मिला कर किया गया क्योकि रशियन औऱ पश्चिमी सभ्यता को किसी न किसी सभ्यता से मिलना ही था तो भारत मे मुस्लिम परिदृश्य में ढाला गया
वेसे ही इस मिथक कहानी को यूपी परिदृश्य में ढाला ग़या है
चंदेरी गाँव मे यह तीन दोस्तो की कहानी है
तीनो कुँवारे नोजवान है
नोजवान होने के साथ विपरीत लिंग से आकर्षण होना लाजमी है यह तीन दोस्त विकी(राजकुमार), बिट्टू(अपारशक्ति खुराना) दंगल फेम,जना(अभिषेक बनर्जी) चंदेरी गांव में अपनी मस्ती में रहते है, अचानक विक्की को एक अजनबी लड़की मिलती है स्त्री (शृद्धा कपूर) मिलती है और विकी को प्यार हो जाता है
गाँव मे एक विशेष समय पर पूरे गाँव मे दीवारों पर लिखा मिलता है “स्त्री कल आना”
तीनो की मुलाकात गाँव के रुद्रा दादा (पंकज ट्रिपाठी) से होती है, रुद्रा दादा उनको स्त्री चुड़ैल के बारे में बताता है और बचने का उपाय भी देता है
यहां तक तो पहला भाग जो है  हास्य से भरपूर है,जिसमे रोमांस भी है
पटकथा भी उत्तम लिखी गई है  जो कि राज निदीमोरू ओर कृष्ना डिके की है,
कला निर्देशन भी बढ़िया है
गाँव की लोकेशन असल लगती है जो कि सागर माली का है लोकेशन प्रभावित करती है
विक्की के दोस्त जना को स्त्री चुड़ैल  उठा ले जाती है
विकी का दोस्त बिट्टू का शक विकी की अनजान प्रेमिका पर जाता है,
अब विकी, बिट्टू, रुद्र दादा तीनो गाँव के उस खंडहर में जाते है जहां यह माना जाता है चुड़ैल या वेश्या का वास था अब यह उस चुड़ैल से सामना होता है और फ़िल्म में नया मोड़ भी आता है जिसे देखकर आप निश्चित ही चकित होने के साथ राहत की साँस भी लेते है
अब खोजी दोस्त तीन से चार हो गए है
रुद्र दादा एक किताब निकालते है अपने भंडार में से चंदेरी पुराण जिसमे उस वेश्या की जानकारी होती है लेकिन उस किताब के कुछ पेज गायब होते है तो वह लोग उस के लेखक (विजय राज)के पास पहुचते है
लेखक मदद तो नही करता लेकिन एक पहेली देता है जिसमे उस चुड़ैल से छुटकारा पाने का हल होता हैं
यह पहली क्या है,
क्या चुड़ैल स्त्री से छुटकारा मिलेगा
इन सवालों के लिए हल्की फुल्की अमर कौशिक की  मनोरंजन फ़िल्म देखना पड़ेगी, अमर इससे पहले घनचक्कर, आमीर, आबा निर्देशित कर चुके है
अदाकारी पर बात करे तो
राजकुमार लाजवाब है, असीमित प्रतिभा भरे हुवे है खुद में, पंकज त्रिपाठी, अभिषेक, अपार शक्ति भाषा पर पकड़ ओर अभिनय से निश्चित ही आपके दिल की गहराइयों में घर बना जाएगे
फ़िल्म गुदगुदाते हुवे डराती भी है लेकिन अंत थोड़ा निराश करता है इस पर काम हो सकता था
हमारी तरफ से फ़िल्म को 3 स्टार्स
समीक्षक
इदरीस खत्री

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