फ़िल्म “सिटी जॉब” छोटे शहरोँ से बड़े शहरों में आकर नौकरी करने वालों का संघर्ष बयान करती है

विक्रम भट के सहायक निर्देशक के रूप में अपना कैरियर शुरू करने वाले ज़ाकिर सिसोदिया का मानना है कि आज के दौर में फिल्म बनाना कोई आसान काम नहीं है। मार्बल के बिज़नस से जुड़े ज़ाकिर यह भी कहते है कि एक निर्देशक को फिल्म के हर डिपार्टमेंट की उचित जानकारी होनी चाहिए क्योंकि एक डायरेक्टर ही जहाज का कप्तान होता है। उसे फिल्म मेकिंग के हर क्षेत्र की इंफॉर्मेशन होना ज़रूरी है। इसी पॉइंट को ध्यान में रखते हुए ज़ाकिर ने फिल्म निर्माण की तमाम बारीकियों और गहराइयों को सीखा, समझा और जिया है। उन्हें फिर भी सिनेमा के बिज़नस में ख़तरे दिखाई देते है। लेकिन इस युवा फ़िल्मकार को आशा है कि यदि फिल्म की स्टोरी और कंटेंट बेहतर होगा तो दर्शक फिल्म को स्वीकार कर लेते है।
फिल्मकार ज़ाकिर सिसोदिया अपने वर्षो के अनुभव के आधार पर एक मूवी बना रहे है जिसका नाम है “सिटी जॉब”.
राजस्थान के मकराना के रहने वाले और गुलाबी शहर जयपुर से पढ़ाई करने वाले ज़ाकिर को कॉलेज टाइम से ही फिल्मो का जुनून था । कई बड़े फिल्मकारों के साथ बतौर सहायक काम करके वह मूवी मेकिंग के तमाम अनुभवों से गुज़रे। और अब अपने इन्ही तमाम वर्षो के तजुर्बे की रौशनी में वह फिल्म सिटी जॉब बना रहे है जिसमे छोटे शहरो से महानगरों में आकर नौकरी करने वाले लोगों की लाइफ स्टाइल को रुपहले परदे पर उतारने को तैयार है।
उन का कहना है कि “सिटी जॉब”बड़े शहरों में नौकरी करने वालों की मानसिकता को दर्शाती एक मीनिंगफुल फिल्म है जिसमे मनोरंजन के तमाम पहलु भी हैं। इसके लेखक,निर्देशक और निर्माता ज़ाकिर सिसोदिया हैं । इस फिल्म की शूटिंग जल्द ही जयपुर,दिल्ली,उत्तर प्रदेश और पंजाब में होगी जबकि इसके एक रोमांटिक गीत को लन्दन में फिल्माने की भी योजना है। यह फिल्म नए कलाकरों को लेकर बनाई जाएगी, कलाकारो का चयन जारी है।

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