सपनो को परवाज़ देती फ़िल्म गल्ली बॉय

फ़िल्म समीक्षक इदरीस खत्री द्वारा निर्देशक:-ज़ोया अख्तर अदाकार:- रणवीर सिंह, आलिया भट्ट, विजय राज, कल्कि, सुरवीन चावला, सिद्धांत, अमृता सुभाष, संगीत:- अंकुर तिवारी दोस्तो, फ़िल्म से पहले एक छोटी चर्चा कर लेते हैं, फ़िल्म रैप संगीत पर आधारित है यह भी संगीत का एक आयाम है जो कि ब्राज़ील, अमेरिका से होता हुआ भारत पहुचा है, भारत मे करीब 15 साल पहले एक गायक बाबा सहगल रैप गानों को गाते थे जिन्हें रैपर कहा जाता है, लेकिन इस विषय पर भारत मे पहली फ़िल्म बनी है,,भारत के स्ट्रीट सिंगर्स डिवाइन…

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facebook वाला प्यार…

निर्देशक के नारायण साहू जिस तरह से फेसबुक से प्यार को अपने कैमरे पर संजोया है देख कर ऐसा लगता है कि सच में अगर हर मां बाप अपने बच्चों की शादी इसी तरह से करें तो शायद आने वाले समय में कोई भी लड़का घर से भाग कर शादी नहीं करें। बिल्कुल ही सोच लेकर निर्देशक ने इस फिल्म को बनाया है शुरुआत से लेकर अंत तक कहीं भी ऐसा नहीं लगता की एक फिल्म पारिवारिक नहीं है फिल्म को सेंसर ने यू सर्टिफिकेट दिया यही कारण है की…

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ठाकरे, शेर का उदय, एक आवाज़ जो बन गई पूरे प्रदेश की आवाज़.

निर्देशक -अभिजीत पानसे कलाकार-नवाज़ुद्दीन, अमृता राव, सुधीर मिश्रा, राजेश खैर, डॉ. सचिन, विशाल सरदेश्वर, अब्दुल कादिर अमीन, लक्ष्मण सिंह,, दोस्तो हम पहले बायोपिक पर चर्चा करेंगे फिर फ़िल्म पर यह दशक ही बायोपिक से लबरेज़ चल रहा है, पान सिंह तोमर,दंगल, सरबजीत, अज़हर, सचिन,धोनी, बुधिया, संजू, मंटो और अब ठाकरे इस फ़िल्म के शुरू में ही घोषणा कर दी गई कि –कुछ कल्पनाओं का समावेश किया गया है जो कि खलता है,बायोपिक में कोई जगह नही होती कल्पना की लेकिन निर्देशक अपनी सुविधानुसार या मन माफिक अंजाम के लिए फेर…

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मणिकर्णिका इतिहास तक ले जाने में सफल

निर्देशक -कृष अदाकार-कंगना रणौत, डेनी, जीशान अय्यूबी, अंकिता लोखंडे, अतुल कुलकर्णी दोस्तो भारतीय इतिहास में वीर रस के कवित्व में हम सब ने पड़ा और सुना है खूब लड़ी मर्दानी झांसी वाली रानी ,,,, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के जिक्र के बिना भारतीय स्वतंत्रता की बयान अधूरी प्रतीत होती है,, 18वी सदी में जब पूरा भारत अंग्रेजो की मातहत कुबूल कर चुका तब लक्ष्मीबाई ने न केवल ईस्ट इंडिया कम्पनी की मुख़ालेफ़त की, साथ कि अंग्रेजो से अपनी भूमि, राष्ट्रवाद हेतू राजा होने के कर्तव्य निर्वहन करते हुवे वीर गति…

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ज़ीरो दर्शको को मोह गए बउआ।

निर्देशक:- आनंद एल रॉय लेखक -हिमांशु शर्मा अदाकार :-शाहरुख, अनुष्का शर्मा कोहली, कैटरीना कैफ, तिग्मांशु धूलिया, अभय देओल, जावेद जाफरी, शीबा चड्डा, आर माधवन, जिशान अय्यूबी,बृजेन्द्र काला, अवधि :- 164 मिंट संगीत:- अतुल अजय बजट :- 160+38=200 करोड़ ₹ लगभग स्क्रीन्स :- 4500 भारत फ़िल्म से पहले हम लोग आनंद रॉय, हिमांशु जोशी की जोड़ी पर चर्चा कर लेते है,,, आनंद और हिमांशु की जोड़ी शुरू से ही कमाल करती आई है, चाहे रांझणा, तनु वेड्स मनू, तनु मनू रिटर्न्स – तीनो फिल्मो की कहानी और निर्देशन कमाल का था,,…

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फिल्मो में बढ़ता VFX का चलन, भाग –2

दोस्तो VFX का हिंदी प्रचलित कोई लब्ज़ नही मिलने और यही लब्ज़ प्रचलित होने के कारण अंग्रेजी भाषा से ले लिया दोस्तो VFX का प्रभाव और इस्तेमाल फिल्मो की आनिवार्यता बनते जा रहा है आज पिछली चर्चा को आगे बढ़ाता हूँ, हॉलीवुड तो बेइंतेहा आगे सफर कर रहा है VFX के मामले में, हम यानी भारतीय सिनेमा हॉलीवुड सिनेमा से न केवल प्रभावित है वरन उसकी अनुकरण यानी कॉपी को शान समझता है, क्योकि हॉलीवुड की फिल्मों में जो माइल स्टोन स्थापित किया है वह अतुलनीय के साथ प्रसंशात्मक भी…

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रिव्यू-‘2.0’-शानदार दृश्यों में लिपटी खोखली फिल्म

आठ बरस पहलेआई ‘रोबोट’ मेंडॉ. वसीकरन केबनाए रोबोटचिट्टी को समाजके लिएखतरनाक मान कर सरकार ने लैब में बंद कर दिया था। लेकिन अब उसकीज़रूरत आन पड़ी है। खतरा है ही इतना बड़ा कि सिर्फ चिट्टी ही उससे निबटसकता है। और यह खतरा है मोबाइल फोन से। सारे शहर के मोबाइल फोनअचानक उड़ कर गायब हो चुके हैं। कौन कर रहा है ऐसा और क्यों? वसीकरनऔर चिट्टी कैसे निबटेंगे उससे? ‘रोबोट’ आई थी तो उसे देखकर गर्व महसूस हुआ था किसाईंस-फिक्शन पर सिर्फहॉलीवुड का ही एकाधिकारनहीं है। वैज्ञानिक परिभाषाओंऔर मानवीय संवेदनाओं कोमिला कर हमारे लोग भीकायदे की कहानी कह सकते हैं। इस फिल्म ने यह भी दिखाया था कि स्पेशलइफैक्ट्स के मामले में भी हम किसी से कम नहीं हैं। उम्दा कहानी, कसी हुईस्क्रिप्ट, मंजे हुए निर्देशन, शानदार तकनीक, गीत-संगीत, एक्शन, रोमांस,दुश्मनी, छल-कपट, अहं, हास्य, रजनीकांत-ऐश्वर्या राय, डैनी के सधे हुएअभिनय जैसे तमाम तत्व परोसते हुए इस फिल्म ने दक्षिण से आने वाली डबफिल्मों की आंधी को तेज किया था। इसीलिए जब से ‘रोबोट’ के सीक्वेल ‘2.0’के आने की आहट हुई तो इस फिल्म पर उम्मीद भरी निगाहें जमने लगी थीं।लेकिन बड़े ही अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि यह फिल्म उम्मीदें तोड़तीहै और सिर्फ स्पेशल इफैक्ट्स को छोड़ कर हर मोर्चे पर बेहद औसत दर्जे कीलगती है। एक पक्षी-विज्ञानी का माननाहै कि मोबाइल फोन औरमोबाइल टॉवर से निकलनेवाले रेडिएशन से पक्षी मर रहेहैं। वह पक्षी-विज्ञानी कैसेबना, इसके पीछे की जोबचकानी वजह फिल्म मेंबताई गई है उसे देख-जानकर आप चाहें तो हंस सकते हैं, चाहें तो लिखने वाले की अक्ल पर तरस भी खासकते हैं। खैर, सब तरफ से यह बंदा इतना निराश हो जाता है कि इसे मोबाइलफोन और उसे इस्तेमाल करने वालों से नफरत हो जाती है क्यों भई, इस्तेमालकरने वालों की क्या गलती…? लगता है डायरेक्टर शंकर यह भूल गए कि उन्हींकी फिल्म ‘अपरिचित’ का हीरो ट्रेन में घटिया खाना मिलने पर खाना खानेवाले, बेचने वाले या बनाने वाले को नहीं मारता बल्कि उस ठेकेदार को मारता हैजो पूरे पैसे लेकर भी घटिया खाना बनवाता है। यही व्यावहारिक भी है,तर्कसंगत भी। ओह, हो, हो… तर्क की बात तो आप इस फिल्म को देखते समयकीजिए ही मत। और आप हैं कौन? जिन्होंने ‘रेस 3’ और ‘ठग्स ऑफहिन्दोस्तान’ हिट करवा खुद ही इन निर्देशकों को बता दिया कि आप चमकतेरैपर में लिपटी घटिया चीज़ भी खुश होकर गटक लेते हैं। तो लीजिए, उन्होंनेआपको बेहद शानदार स्पेशल इफैक्ट्स में लपेट कर यह फिल्म दे दी है, गटकलीजिए। हॉलीवुड की फिल्मों में हमअक्सर देखते हैं कि एक भीड़भरे इलाके में कोई सुपरविलेन और सुपर हीरो आपसमें भिड़े हुए हैं, लेकिन लोगउनकी तरफ ध्यान दिए बगैरआ-जा रहे हैं, हालांकि इसभिड़ंत में ढेरों लोग मर रहे हैं,इमारतें टूट रही हैं, गाड़ियांउड़ रही हैं लेकिन लोग अपने में बिज़ी हैं और ये दोनों हैं कि बस, भिड़े हुए हैं।यह देख कर कई बार लगता है कि क्या सचमुच ऐसा हो सकता है? यहां तोसड़क पर दो सांड भिड़ जाएं तो पब्लिक ऑफिस-दुकान जाना छोड़ कर मजमालगा ले। लेकिन इस फिल्म में ऐसा ही है। भई, एक तो आपको हॉलीवुड स्टाइलका एंटरटेनमैंट दे रहे हैं और आप हैं कि तर्क की पूंछ पकड़ कर झूल रहे हैं। हदहै…! चिट्टी ने आकर किया क्या,सिवाय साबू-नुमा हरकतेंकरने के, जो चाचा चौधरी कोबचाने के लिए सिर्फ ताकतका इस्तेमाल करता है,दिमाग का नहीं। उससे बेहतरतो वो लेडी-रोबोट निकली।शक्ल से सपाट एमी जैक्सनसुंदर तो लग ही रही थीं। औरपिछली वाली फिल्म के डैनीके इस फिल्म वाले बेटे, तुमको यह तीन सीन का ही रोलमिलना था? कायदे का रोल तो इस  बार किसी भी साइड-एक्टर को नहीं मिला।अक्षय कुमार पूरे समय गैटअप में ही रहे सो ध्यान उनके मेकअप पर ज़्यादाजाता है, एक्टिंग पर कम। रजनीकांत के फैन चाहें तो उन्हें देख कर गिर-पड़-लेट सकते हैं लेकिन इस बार तो वो भी कम ही जंच रहे थे। और हां, वसीकरनकी पत्नी सना के लिए इन लोगों को कायदे का रोल तो छोड़िए, ऐश्वर्या राय कीआवाज़ तक न मिल सकी, हाय…! गीत-संगीत पैदल है। हालांकि फिल्म एक अच्छा मैसेज देने की कोशिश करती है कि आज हर इंसान मोबाइल फोन का गुलाम हो चुका है। लेकिन फिल्म के भीतर लड़ाई इस गुलामीसे लड़ने की बजाय रेडिएशन से लड़ी जाती है। रेडिएशन इंसानों को भी नुकसानपहुंचाता है, इस आशय के संवादों को सेंसर ने काट दिया। तो साबित क्याहुआ…? पक्षियों के प्रति भी यह फिल्म कोई खास संवेदनाएं नहीं जगा पाती।दरअसल यही इस फिल्म की सबसे बड़ी कमज़ोरी है कि इसकी कहानी आपकोछुए बगैर निकल जाती है और आप सिर्फ भव्य दृश्यों की चकाचौंध में खोएरहते हैं। फिल्म में कई सारे ब्रांड्स के विज्ञापन घुसेड़ने में जो दिमाग लगायागया, उसे कहानी को मजबूत बनाने में लगाया जाता तो इसका कद कुछ औरही होता। यह फिल्म सिर्फ और सिर्फ अपने स्पेशल इफैक्ट्स के लिए ही देखी जा सकतीहै। आंखों पर थ्री-डी चश्मा लगाने के बाद अपने दिमाग को स्लीप-मोड में डालदीजिएगा। ज़रा-सा भी तर्क आपके मनोरंजन में खलल डाल सकता है। अपनी रेटिंग-ढाई स्टार दीपक दुआ फिल्म समीक्षक 

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नाम बड़े दर्शन खोटे

हाल ही फ़िल्म प्रदर्शित हुई ठग्स ऑफ हिन्दोस्तान, जिसके प्रदर्शन पूर्व बड़ी बड़ी घोषणाए, लोक लुभावन वादे ओर फ़िल्म को लेकर सपने दिखाए गए थे हत्ता की प्रचार में फ़िल्म को भारत की सार्वकालिक महंगी फ़िल्म बताया गया बजट 250+60यानी 300 करोड़ी फ़िल्म बताया गया लेकिन फ़िल्म को न तो समीक्षकों के गले उतरी ओर न ही दर्शको के गले उतर पाई कहने का मतलब यह कि बड़ी स्टार कास्ट कोई सफलता की ग्यारंटी नही होते है, फ़िल्म बजट 300 करोड़ आमदनी 160 करोड़ मात्र तो फ़िल्म फ्लॉप की श्रेणी…

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भईया जी सुपरहिट

भईया जी सुपरहिट काश नाम की तरह काम चल जाता लेकिन फ़िल्म में ऐसा कुछ भी न हो पाया यह फ़िल्म लगभग 7 साल पहले शुरू हुई थी, सन 2012 में इसका पहला पोस्टर लांच किया गया था उसके बाद से तमसम पचड़ों(लम्बी दास्तान) के चलते फ़िल्म न बन पाई न प्रदर्शित हो पाई, अब जाकर फ़िल्म प्रदर्शित हुई तो हुवा भी यही जो स्टॉक क्लियरन्स सेल में होता है, दर्शको ने सिरे से नकार दिया, अब जब कि बॉलीवुड दर्शको को हिंदी, दक्षिड, हॉलीवुड के साथ विश्व सिनेमा आसानी…

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ठग्स ऑफ हिंदुस्तान साल की सबसे बड़ी फिल्म ठग नही पाई

ठग्स ऑफ हिंदुस्तान साल की सबसे बड़ी फिल्म् समय :- 164 मिनट अदाकार :- अमिताभ, आमिर, कैथरीना, फातिमा सना, जैकी श्रॉफ, रोनित रॉय, शशांक अरोरा, ल्योड़ ओवेन व अन्य आधारित :- कन्फेशन ऑफ ठग, फिलीप मेडोस टेलर के उपन्यास (1839) पर, (यह चर्चागत विषय-इस पर अगली समीक्षा) निर्देशक व पटकथा:- विजय कृष्ण आचार्य उर्फ विक्टर संगीत:- अजय अतुल गीत:- अमिताभ भट्टाचार्य निर्माता:-YRF-आदित्य चोपड़ा भाषा:- हिंदी, तमिल, तेलगू छायांकन:- मानुष नंदन इफेक्ट:- विशाल आनंद, लुइस ब्रेड्स वेषभूषा:- रविन्द्र पाटिल सेट:- रचना मन्डल स्क्रीन्स:- 5300 भारत, 1500 ओवरसीज़ बजट:- 250 करोड़₹(160+90 करोड़)…

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